होली की शुभकामनायें!
एक मालूम सी विश जरा गौर फरमाईएगा
"कहते है
सच्चाई छुप नही सकती बनावट के उसूलो से
कि खुशबू आ नही सकती कागज़ के फूलो से
ये दिल तेरा दीवाना था अब बी तेरा दीवाना है
तुम छुपा सकते हो हम छुपा नही सकते
जरा गौर फरमाईए गा
दिल इतना डूबा था समंदर बी बढ़ा गहरा था
हम तो डूब गए हम्हे कहा जाना था
वो बारिश थी या आंधी थी हम्हे ना तब पता था न अब पता है
Cheers
मनीष गाहल्याण
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